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रिश्ते नाते

Aug 11, 2025
2 min read

By Vijay Kumar Nagar


तार तार हो रहें हैं रिश्ते. उम्र भर के इस ज़माने में

उम्र गुजर गई हमारी. मतलबी रिश्ते निभाने में.

कुर्बानियों से सींचे थे हमने. जो बेशकीमती रिश्ते

हुआ ना ज़रा भी दर्द उनको. हम से निजात पाने में.

एतबार कर भी लूँ वादे पर उनके. पिछली शाम के

मुझे आता नहीं तैश. वादे उनके आज़माने में.

सर अपने हम ले लें. तोहमत सारे बेवफाई के

बाज आएंगे ना वो. फिर भी. एक और तोहमत लगाने में.

क्यों याद करूँ मैं किस्से. काहिल क़िस्मत की बदतमीजी के

तरीका कोई कारगर नहीं हुआ. वह वाकये भूल जाने में.

दिखा भी दूँ गर मैं. लगे दाग सारे दामन के

रकीब मसरूफ़ है. मेरा तमाशा सरे आम बनाने में.

अवाम को ना दे सका निजात. दहशतगर्दी से कोई नश्तर

सियासत नाकाम हो गई. मुल्क से इसे मिटाने में.

नारे लग रहे थे घाटी में जब ये. हिन्दू किधर से आई

मुब्तिला थे सदर ए रियासत लंदन में. गोल्फ का शॉट लगाने में.

बचा ना सकी फ़ौजी सरगर्मियाँ. इस आफत से कोमों को

सियासतदाँ मसरूफ़ हैं. इंसानियत के इस दाग को छिपाने में.

धुल पाएगा कैसे ये दाग. लगा इंसानियत के दामन में

सियासत मशगूल हैं. तकसीम कर खैरात इसे दबाने में.

बच्चे. बूढ़े औरतें सब कर गए हिजरत. पुश्तैनी ज़मीं से

चुराने लगा मुल्क सारा आंखें. उन्हें गले लगाने में.

आगे जो रहते थे हमेशा. रामजी की जय-जय कार में

बगलें क्यों झाँकने लगे. रामजी के बंदों को बचाने में.

खामोश क्यूँ हो गए. भगवा परचम फहराने वाले

सब ने कोताही क्यों बरती. आवाज़ बुलंद उठाने में.

नाकाम हुए जो बचाने में बसेरा. जान ओ माल देकर भी

खता वार थे वह सब. पड़ोसी की पहचान करने में.

शहीद हुए नफ़रत में. नाम जिनका प्रेम भाई था

शर्मसार हुआ प्रेम. नफ़रत के पडोस में रहने में.

लुट गई अस्मत बहनों की. हाथों कल तक जो भाई थे

वो हाथ क्यों नहीं काँपे. ऐसी बहशी हरकत करने में.

फरियाद इनकी भी सुन लो. खौफ़ से जकड़े लबों की

कमी क्या रह गई थी. भाईचारा गैर दीन से निभाने में.

बढ़े कुछ हाथ जो हुल्लड़ से. जवानियों के गरेबान पर

जिस्म नोचने वालों में. भाई थे आगे राखी बंधी करने में.

बढ़े जो क़दम लगाने आग. पड़ोसी बहनों के आशियानों में

होड होती थी बहनों में सेवैयाँ. मिल बाँट कर खाने में.

तैरती है हवाओं में सिसकियाँ. बे आबरू औरतों की

महफूज नहीं हैं वादी में. औरतें घर में रहने मैं.

तवारीख लिखी जाएगी. फिरदोस की खूनी रोशनाई से

बेताब हैं खुदाई ख़िदमतगार. दर्ज नाम अपना करवाने में.


By Vijay Kumar Nagar



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