राते है गहरी
By Nisha Dudi
राते है गहरी
दिन है घना
दिल की वीरानियों में
ग़म को मिल गई है पहना
इस उजड़े से जंगल में
पतझड़ का लगा
रोशनी की लो दिखाए तो किसे
सब तो यहां अंधेरे से सना
राते है गहरी
दिन है घना
फिर हम को चलना होगा
अंधेरे को ढालना होगा
सूरज को फिर निकलना होगा
हमें मेहनत की आग में जलना होगा
दिल से हमारे गुम को निकलना होगा
जंगल को फिर से संवरना होगा
पत्तों को फिर से जड़ों से निकलना होगा
फिर जाकर कही
राते होगी चांदनी
दिन होगा रोशन.....
By Nisha Dudi

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