ये मेरा अंत नहीं
By Sarthak Sahay
कैसे लड़खड़ा जाऊं,
कैसे हार मान जाऊं।
कर्तव्य पथ के इस डगर पर,
जीवन का है जो अहम प्रहर।
माना की अवसर अनंत नहीं,
पर ये मेरा अंत नहीं।
अभी तो है शुरुआत,
भले मिली है काली अंधेरी रात।
पर असीम प्रकाश लाना होगा,
खुद को उस काबिल बनाना होगा।
माना की अवसर अनंत नहीं,
पर ये मेरा अंत नहीं।
पराजय मिली है तो स्वीकार करूंगा।
प्रयास से अधूरे सपनों को साकार करूंगा।
अटल विश्वास के साथ अंत तक लडूंगा।
संपूर्ण निष्ठा के साथ अपना कर्म करूंगा।
माना की अवसर अनंत नहीं,
पर ये मेरा अंत नहीं।
मेहनत की होती सदा जयजयकार है।
शेर की भी कभी न कभी, पर होती हार है।
हार ना होने पर झलकता अहंकार है-
प्रयत्न से ही सफलता का शिखर हासिल होगा।
आज का अथक प्रयास ही तुम्हारा कल होगा।
ये कर्म पथ कहां सरल होगा।
माना की अवसर अनंत नहीं,
पर ये मेरा अंत नहीं।
By Sarthak Sahay

Prernadayak kavita
Powerful lines
Best poetry
So proud to have sach a talented brother of mine ❤️
बहुत अच्छी कविता
बहुत अच्छा
Fantastic