ये परिवार साथ नही छोडते
By Pranali Deshmukh
किसी ब्रिज के निचे , रेलवे स्टेशन या बस अड्डेपर
बेखौप होकर भीड़ में दिखनेवाले एकजैसे चेहरे
बाल बिखरे हुए कपडोंपर नजाने कितने सारे छेद
सरपर गठड़ा बगल में कलेजा का टुकड़ा लेकर
कड़ी धुप या बारिश में निले छत तले ये परिवार एकदूसरेका साथ नहीं छोड़ते .....
क्या इनकी कोई जरूरते नहीं होती ?
किसी मॉल या रेस्टोरेंट में जाने का
ख्याल कभी आता नहीं इनके मन में
पत्त्थर फोड़ते , सड़के बनाते जहाँ पेट पालनेके लिए निवाला मिल जाये वही सरपर आसमान ओढ़कर सो जाते ये
परिवार एकदूसरेका हाथ नहीं छोड़ते ....
रोज की रोजी रोटी जो मिला वो बाटकर खा लिया
कल की कोई चिंता नहीं न बैंक बॅलन्स न कोई आधार कार्ड कब होती है इनकी शादी कब शामिल होती है इक नन्ही
जान किसी कोने के पेड़ को झूला बांधकर दब जाती है शायद इनकी किलकारियाँ
माँ , बाबा को किसी वृद्धाश्रम में नहीं छोड़ते ये पगले
नाकि किसी सांस ने बहु को जलाया सुना है कभी
सगे सौतेले परिवार अंधेरेमे भी हाथ नहीं छोड़ते ....
सूखे टुकड़े खाकर भी इनको डायजेशन व्याधि नहीं होती बी पी शुगर की गोलिया ये लोग लेते नहीं क्या ?
मैंने गौर से देखा है सावली तिखे नैन नक्श वाली औरतोंको फिगर भी मेंटेन रहती है इनकी न डायटिंग न ज़ुम्बा न
कोई योग पिले दात बाजूओंपर हरे रंग की गुंदाई , भूरी नीली रहस्यमयी आँखे , तूफान समेटकर , लावा छुपाकर
अपमान तिरस्कार बड़ी सहजता से पचा लेते है
सुख दुःख में ये परिवार साथ नहीं छोड़ते
इनके जीने मरनेसे शायद किसीको फर्क पड़ता होगा
आजकल हम सब घरोमे सुरक्षित और बुज़े चूल्हे
देखकर कोई सहृदयी कुछ अनाज देकर एक सेल्फी जरूर निकालता है , इनको तो इल्म तक नहीं सेलिब्रिटी बन गए है
ये गवार जाहिल
पाल डालकर रेहनेवालोके घर में चूहे भी नहीं आते
न गाँव न कोई ज़मीन जन्म से मृत्यु तक शरीर का सिर्फ एक हिस्सा भूख के कारन जिन्दा होता है बाकि अवयव
बचपनसेही मौन ,शिथिल , मृत होते है शायद
स्थलांतर करते ये परिंदे परिवार का हाथ नहीं छोड़ते ....
By Pranali Deshmukh

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