ये जिंदगी………
By Priya Jain
कल एक झलक ज़िन्दगी को देखा,
वो राहों पर मेरी गुनगुना रही थी,
फिर ढूंढा उसे इधर उधर,
वो आंख मिचौली कर मुस्कुरा रही थी,
एक अरसे के बाद आया मुझे करार,वो शहला के मुझे सुला रही थी,
हम दोनों क्यों खफा है एक दूसरे से,
मैं उसे और वो मुझे समझा रही थी,
मैंने पूछ लिया क्यों इतना दर्द दिया कमबख्त तूने,
वो हंसी और बोली मैं जिंदगी हूं पगले तुझे जीना सिखा रही थी,
मैने इसे पूछा अब कौन सा पन्ना लाएगी,
ओर कौन सा एहसास दे जाएगी,
इसने बोला जो तुझे एक नए मार्ग की ओर ले जाएगा, ओर नया संबंध दे जाएगा।।
By Priya Jain

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