यूही कभी सिर्फ़ मुझसे मिलने आओगे ?
Updated: Jul 16, 2025
By Ruta Joshi

यूही कभी सिर्फ़ मुझसे मिलने आओगे ?
सौ दफ़ा मनाने से नहीं , चाय के एक बहाने से आओगे ?
और सवेरे ही तुम्हें याद किया ! ये आकर बताओगे ?
रात के अंधेरों में चार दीवारों के बीच नहीं ,
रूमानी शामो में समुंदर किनारे मिलोगे ?
और एक पल ही सही, मेरी आखों में कभी तुम खोये थे ,ये यक़ीन दिलाओगे ?
जिस्म की लेनदेन दिलकश हैं बेशक , पर कभी बेमतलब की बातों में उलझने आओगे ?
आज गिन के वक़्त लेके नहीं , चुन के यादें लेने आओगे ?
ऐरा-ग़ैरा सिर्फ़ तुम दोस्त नहीं , एक दिन का मेरा आशिक़ बनोगे ?
क्या आज सिर्फ़ मैं नहीं , तुम भी थोड़ी देर और ,रूखना चाहोगे ?
अपने ख़्वाबों में ,ऐसे मुझे कभी लाओगे?
वहीं पर कम से कम ,क्या ये ख्वाहिश पूरी कर पाओगे ?
By Ruta Joshi

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