याराना
- Hashtag Kalakar
- Nov 26, 2025
- 2 min read
By Arpita Yadav
बताई जाने जैसी कोई बात नहीं है,
महफिल उतनी खास नहीं है,
अमावस्या जैसी जिंदगी में,
कोई पूनम की रात नहीं है,
हाँ यारों, अब जिंदगी में दोस्तों जैसी कोई बात नहीं है।
शर्मा जी का यह शरीफ बेटा भी दबंग था,
साथ जब उसके दोस्तों का संग था ।
कुछ पुराने यार थे,
आखिरी की सीटों पर कब्ज़ा था।
दोस्त के खातिर तो,
सीनियर तक से लड़ जाने का जज़्बा था।
दोस्त के हमेशा साथ रहने का घमंड था,
पढ़ाई वढ़ाई तो ठीक थी,
बाकी एक्जाम तो झंड था।
हर एक पल में उमंग था ,
हमारी यारी के जमाने में ,
हर एक दिन सतरंग था।
टिफिन टीचर की मौजूदगी में खाने वाले बदमाश थे,
सुन कर हमारे किस्से,
पड़ोसी भी हताश थे।
स्कूल में सबसे ऊंचा अपना टोरा था,
बैग तो हमारे लिए बस किताबों का बोरा था।
मास्टर की कभी सुनी नहीं,
इस बात का रिकॉर्ड है।
शायद तभी हमारे पास ऑल्टो और बाकियों के पास फोर्ड है।
अमीर बकरे को फसाना अपना काम था ,
ले जाकर कैंटीन,
निकलवाना अपने बिल का दाम था।
काम यही हमारा बस सुबह-शाम था ,
तभी तो टीचर्स की मोस्ट-वांटेड लिस्ट में सबसे ऊपर अपना नाम था ।
जिगरी थे यार, पूरी पक्की थी यारी।
ना तोड़ पाई टीचर्स की कोई साज़िश दोस्ती हमारी,
फिर ना जाने क्यों,
उनको देखने के लिए निगाहें तरसी हैं।
मन था सावन जिनकी मौजूदगी में ,
आज उनके लिए ये बरसी हैं।
खत-खत में हो गई कोई खता है क्या,
कहां हो तुम मेरे यारों, किसी को पता है क्या ।
मेरे लिए बस इतने से फसाने हो तुम,
जिस जमाने में जिया मैंने जिंदगी को ,
मेरी जिंदगी के वो जमाने हो तुम ।
By Arpita Yadav

Excellently articulated.
Impressed
Beautiful poem🤍
👏❤️
🤯👏✨️