top of page

यादों की लहरें

By Aditya Mishra


आखिर ये यादों की लहरे मुझे क्यों बिगाड़ती है?

मसरूफ से बैठे इस घरौंदे को क्यों उजाड़ती है?

मस्त मगन चद्दर तान मैं कैसे सो रहा था

अचानक आवाज़ हुई जैसे कोई रो रहा था




बदहवासी में ये यादें उसी के बारे मे सोचती है

उसकी हस्ती तस्वीरे सभी मेरे हृदय को आकर नोचती है

ये हृदय जो इतने हड्डी चमड़े में दबाया हुआ है

उछले उफंगे देखो देखो कैसे घबराया हुआ है

अब इसको शांत करूं कैसे, कौनसी लोरी मै गाऊ

शायद ख्वाब उसका आ दिखे, चलो मैं सो जाऊ।


By Aditya Mishra




Recent Posts

See All
My Words

By Dr. Anuradha Dambhare चार दीवारी मै बैठे ना जाने क्यों ईन खयालोके परिंदो को पर नहीं छुटते... ये खयाल भी शायद लफ्जो के इंतजार मै और...

 
 
 
धी लोचा सिटी।

By Hemangi Sosa ધ લોચા સિટી. અહીંયા વસેલા ચહેરાઓ આ શહેરને એના સ્વાદથી ઓળખે છે. એમ સમજો કે,  આ શહેરમાં તમને સ્વાદના અલગ - અલગ ચહેરાઓ જોવા...

 
 
 
यादें

By Hemangi Sosa યાદો.    કેદ થયેલી ક્ષણો ધબકારા બની ને તમને બેચેન કર્યા કરે છે. પણ , આ છે શું ????        8. (यादें )  ( कैद किए गए पल...

 
 
 

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page