“यादो के झरोखे”
By Renu singh
यादो के झरोखे से आती है याद...
याद उस सफर की, जब थामा था हमने एक दूजे का हाथ,
इंतजार के पल क्यो होते मुश्किल ,
जाना जब मिला तुम्हारा साथ....
यादो के झरोखे सेआती याद।।
शुरू हुए फिर सिलसिले हम से तुम और तुम से हम के,
जहन में बसी है अब भी, वो गुनगुनाती धूप और सर्द मौसम की थी शुरूआत...
यादो के झरोखे से आती है याद।
कब रूठे कब मना ले, किस्से थे वो बेहिसाब,
गुंजाइश नही थी जिद की कोई, पल में यूं हीं मान ली जाती थी हर बात....
यादों के झरोखे से आती है याद।
फुर्सते भी मोहताज हो गई, वक्त के दौर में ऎसे हम बह गये,
दो पल के सुकुन को दिन कितने बीत गये,
अब हाल ऎसा हुआ कि आंखो से समझे दिल की बात..
यादो के झरोखे से आती है याद।।।
By Renu singh

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