यादें
By Mansi Plaha
जानेवालेको कौन रोक सकता है सब किस्मत की बात है
न जानेकिस मोड़ पर कहेजिंदगी बस यही तक का साथ है
चाहूं भी तो कदमों से
यह फासलेकम न कर पाऊंगी
बची हैंतो सिर्फ यादें
जिन्हेंसमेटतेसमेटतेमैंबिखर जाऊंगी जानती हूं हौंसला रखना है
पर अब हिम्मत लाए कौन
जो जा चक
ुी मझुेछोड़ कर
उनके बिना जीना सिखाए कौन
आज भी स्पर्श याद है
आज भी उनकी आवाज़ सनाई ु देती है जो कभी सामनेबठा ै करती थी
वो अब दीवार पर टंगी तस्वीर मेंबसती हैं पकारती ु हूं इस आस में
कि शायद वापस आ जाए
जानती हूं यह मम
ुकिन नहीं
पर इस दिल को कौन समझाए
जो कह न सकी, जो कर न सकी
सिर्फ उसका मलाल है
उन लोगों सेभी क्या कहूं
जो पछतूेहैं – अब क्या हाल है?
By Mansi Plaha

Comments