यादें
- Hashtag Kalakar
- Jan 23, 2025
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By Prathamesh Prakash Jadhav
ए दिल, तू उसकी याद में तड़प रहा है,
अब उसने करवट बदल दी होगी।
जो कभी तेरी आँखों का नूर थी,
अब वो किसी और के ख्वाब बुन रही होगी।
वो जो तेरे शेर पढ़कर तुझे सीने से लगाती थी,
अब उसने वो ग़ज़लों की किताब जला दी होगी।
उसके दिल में तेरी जो तस्वीर थी,
अब उसपर फूलोंकी माला चढ़ा दी होगी।
ए दिल, तू क्यों अब भी उसे याद करता है,
अब उसने तेरी यादोंकी कब्र भी सजाई होगी।
फ़िरदौस, तू चाहे जितनी भी ग़ज़लें लिख दे,
अब उसने तेरी आवाज़ भी भुला दी होगी।
By Prathamesh Prakash Jadhav

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