यादें
By Alka Singh
गुज़रा वो ज़माना याद आया
उम्र वो पुरानी याद आई,
कभी बीता जहां बचपन
अपना वो ठिकाना याद आया।
खेल वो पुराने याद आए
फूल परिजात के याद आए,
मां के लिए कभी गूंथे जो गजरे
वो खुशबू पुरानी याद आई।
वो खिड़की से झांकना याद आया
वो सीढ़ी की दौड़ याद आई,
सबसे पहले कौन पहुंचेगा
वो शर्त पुरानी याद आई।
वो छत पे टहलना याद आया
कटती पतंगों का गिरना याद आया,
वो मांझो से लहूलुहान हुई
पतली सी उंगलियां याद आई।
वो खेल घर-घर का याद आया
अपनी छोटी सी रसोई याद आई,
बनाते थे जो खयाली पकवान
वो स्वाद पुराना याद आया।
वो बेफिक्री के दिन याद आए
वो चंचलता पुरानी याद आई,
लम्हे थे वो कितने सुंदर
वो बचपन सुहाना याद आया।
By Alka Singh

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