यह है संकल्प मेरी
By Binduja Menon
खूब है वो दुनिया
जहाँ है हम सब साथ साथ
मित्रता की है ये भूमि
जहाँ भाटते है सब खुशियाँ
खिलते है हसी की आहट
लहराते है सुखून की हवा
मेहकते है सहोदर्य का सुगंध
ये है वो धरती जहाँ हम
देखते है सच्चे मनुष्य को
यहाँ है सब सदा एकदूजे के साथ
ना है कोई भेद भाव
है तो है बस प्यार ही प्यार
ये है वो भूमी जिसे मैंने मेरी ख्वाब पे सजा
यह हैं वो भूमी जो आजकी लोक से मैलोम दूर
कब बने यह भूमी प्यार की पुण्य स्थान
मुझे होना है ऐसी लोक जहाँ है बस प्यार ही प्यार
मुझे रहना है ऐसी जहाँ,जहाँ है बस प्यार ही प्यार II
By Binduja Menon

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