यह पल भी बीत जाएगा
By Aadarsh Iyengar 'devdarsh'
यह पल भी बीत जाएगा।
अश्रु के सागर में बहकर,
दुःख की आवाज़ बनकर,
यह पल भी बीत जाएगा।
जो रात न सोए अश्रु बहाएँ,
भीतर ही भीतर मरते जाएँ,
अपनी दुविधा भला किसे बतलाएँ?
कुछ सुख के पल मिल जाएँ,
जिनके बल कुछ पल और जी जाएँ,
यह पल भी बीत जाएगा ।
दिल में हैं अनेक सवाल किन्तु,
होठों पर अल्फ़ाज़ नहीं,
यह मनुज अपनी दुविधा कैसे बतलाएगा?
यह पल भी बीत जाएगा ।
गगन में चिड़ियों संग उड़ जाएगा,
बरखा की पहली बूँद-सा मिट्टी में मिल जाएगा,
विपिन मैं खिलते कलियों संग खिल जाएगा,
यह पल भी बीत जाएगा ।
खामोश बैठे जो तारों संग,
एक दिन ज़ोरों से गरजेगा ।
जो गरज न सके कभी,
सुख दुःख की वर्षा बरसाएगा ।
यह पल भी बीत जाएगा ।
दिल की बात मन समझ न पाए,
मन का कहा दिल कर न पाए,
यह दुविधा कौन सुलझाएगा?
यह पल भी बीत जाएगा ।
By Aadarsh Iyengar 'devdarsh'

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