यह क्या रिश्ता है
By Pallavi Vahi
यह क्या रिश्ता है
मैं तेरी क्या लगती हूँ
दिल के रिश्ते की कोई कीमत नहीं है यहां
सब कुछ छोड़ कर आयी तो भी इज़्ज़त
मिलनी मुश्किल है यहां
इतने साल गुज़र गए
पर प्यार तुम्हे आता नहीं
प्यार तुम्हारा जगाना पड़ता है
यह प्यार ही क्या
जो दिल के सागर से न निकले
इतने साल गुज़र गए
इतने में तो इंसान को कुत्ते
से भी प्यार हो जाता है
अरे मैं तोह भूल ही गयी
तुमने तो मुझे अपना कुत्ता ही समझा
फिर भी तुम्हे प्यार नहीं हुआ
मैं तुम्हारे प्यार में कुछ भी बनने को थी राज़ी
फिर भी तुम्हे पता नहीं चला
तड़प गयी अब मैं
कील कील के मर रही हूँ
लगता है यह दिल का रिश्ता
लगता है यह सच्चा दिल का रिश्ता
मैंने ही बनाया था
अपने ख्यालों में
सोचा था जो भी हो
मैं दिल से हमेशा इससे प्यार करुँगी
यह भी मौका
तुमने मुझसे छीन लिया
अब दिल के टुकड़े मिल ही नहीं रहे
पता नहीं किन किन कुत्तों को डाल दिए तुमने
और मेरी भी किस्मत ऐसी
की इतना बदला लिया मेरे प्यार का
की मुझे पूरा पूरा तोड़ कर छोड़ा
अब यह तुम्हारा कुत्ता न भौंक सकता है
ना प्यार के काबिल है
अब बस ज़िन्दगी गुज़रेगी
अपने आप को ढूंढने में
और मैं क्या भौंकूं
फिर भी करती हूँ तुम्हारा शुक्रिया
आशा करती हूँ
की तुम दूर रहो हमेशा
फिर न मिलना किसी और जनम में
फिर न आना किसी और जनम में
मेरे दिल का टुकड़ा बन के
By Pallavi Vahi

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