मोहब्बत कैसे झुठलाएँ हम………..
Updated: Nov 2, 2022
By Vishal Chaudhary
आँधियों से बुझा ना दीपक जो,
उस प्रेम-लौ को, कैसे बुझाएँ हम !!
मोहब्बत में किए जो वादे थे,
उन वादों को, कैसे झुठलाएँ हम !!
ताप भी है, नब्ज़ भी बढ़ रही
ये मर्ज़-ए-दिल, किसको बतलाएँ हम !!
दिन नही गुज़र रहा, शाम नही ढल रही
ये वक़्त ठीक, अब किससे करवाएँ हम !!
भर गए हैं आँखों में, अश्कों के समंदर
उन मोतियों को बता, कहाँ बहाएँ हम !!
कहता है ज़माना, कि फिर दिल लगा लो
अब जो टूटा हुआ, वो कहाँ जुड़वाएँ हम !!
तुझपे ग़ज़लें, महफ़िलें गुलज़ार करती थी
तेरे बग़ैर महफ़िलें, कैसे सजाएँ हम !!
तेरी ज़ुल्फ़ों में उलझ, नायाब हुए थे गुल
उन गुलों को बता, कहाँ छिपाएँ हम !!
पाँवों में पड़े हैं छाले कुछ,
दोष राहों का भी, क्या बतलाएँ हम !!
दफ़्न सीने में जो छलनी दिल है ना,
वो किस किस को दिखलाएँ हम !!
By Vishal Chaudhary

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