मोहब्बत ए दस्तूर
Updated: Aug 2, 2025
By Mrinalini Gajbe
मोहब्बत-ए-दस्तूर कुछ है यूँही
कुछ दूर चली राहें जुड़ा हुई
छूटा साथ पर सांस है वही,
जहां से चल दिए थे तुम कहीं!
तुम तो आज भी मेरे सरमाये हो,
गर मुड़ के देखा भी ना हो कभी
जिस मिट्टी दफ़नयी यादों की चलनी
जाने दिल के राज़ वही!
हवा जो आती तुझे छु कर
मदहोश आज भी कर देती है मुझे
बातें जो तेरी कभी याद आए
अकेले ही मस्कुरा लेता हूं मैं!
तेरे चौबारे से जो रुखसत हुआ
दूर कहीं निकल पड़ा हूँ मैं
ना साथी, ना कोई मंज़िल है
पर मेरे जाम का साकी तू ही है!
विसाल-ए-मोहब्बत, नसीब वालों को मिलती है
ये मोहब्बत तेरी अब विरासत है मेरी
मैं जो खुश हूँ आज तेरी ही दुआओं का असर है
खुश रहे तू सदा मेरी दुआओं में तू है!
यार्रों न कहना दीवाना मुझे
ये तो मेरी मोहब्बत-ए-सुरूर है
तेरे का का खिला फूल मेरे दिल-ूूूओ-बाग़ में
जिसकी महक मेरे गुलिस्तां में अभी बाक़ी है!
By Mrinalini Gajbe

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