मैं पिछले जन्म घास थी
By Tulsi Chhetry
खुरदरी बातें जब मन छिल जाती हैं
मुझे घास हो जाना अच्छा लगता है
कुचले या मसले जाने पर
तन कर खड़े हो जाना अच्छा लगता है
सड़कें मेरे गांव तक आई
या मेड़े उनकी सड़कों तक पहुंची
तर्कों और आलोचनाओं से घिर कर
मुझे घास हो जाना अच्छा लगता है
चलने, बैठने और लेटने के बीच
हरी, पीली हो कर भूरी होने तक
सारा ब्रह्माण्ड रौंदने की इच्छा लिए
मुझे घास हो जाना अच्छा लगता है
दुनियादारी का विषैला पेड़
अपेक्षाओं के नन्हे पौधों को जब ढांपने लगता है
किसी सिंदूरी शाम बालकनी में खड़े-खड़े ही
मुझे घास हो जाना अच्छा लगता है।
By Tulsi Chhetry

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