मैं नदी सा बह नही पाता……..…
Updated: Sep 21, 2022
By Vishal Chaudhary
दिल में तो रखता हूँ, ज़बाँ तक ला नहीं पाता
मैं तुमसे इश्क़ तो करता हूँ, मगर ये कह नहीं पाता !!
मेरा रोज़ा भी तुम ही हो, मेरा महताब भी तुम हो
इक रोज़ दीदार जो ना हो, ये ग़म दिल सह नहीं पाता !!
ग़ज़ल कैसे लिखूँ तुम पर, ख़ुदी तुम दास्ताँ-ए-हुस्न
इसी कोशिश में लिपटा मैं, लिखे बिन रह नहीं पाता !!
सफ़र तेरी तरफ़ का ये ,फ़लक से भी हसीं है पर
तुम्हारे साथ संगम को, मैं नदी सा बह नहीं पाता !!
By Vishal Chaudhary

Comments