मैं तुझको खुदसे रिहा करता हूं
By Astitva Tripathi
कि जो मर रहा था अब तक तेरी याद में
मैं उस शख़्स को आज़ाद करता हूँ,
हो चले थे शदीद जो ख्याल तेरे
मैं उन ख्यालों को जुदा करता हूं,
मैं तुझको खुदसे रिहा करता हूं.....
अब जिंदगी के फलसफे और भी हैं ,
ज़िम्मेदारियां संभालनी कुछ और भी हैं,
चल फिर से खुद को खड़ा करता हूं,
फिर चुनौतियों से डट कर लड़ता हूं,
मैं तुझको खुदसे रिहा करता हूं.....
रहेंगे वो लम्हे कैद मेरे दिल में,
जो तेरे साथ गुज़ारे हैं।
मेरी रूह भी तुम्हारी है,
मेरे एहसास भी तुम्हारे हैं,
हर बार तय करने पर भी,
मैं आखिरी कोशिश करता हूं।
मैं बिन चाहते हुए भी
तुझको खुदसे रिहा करता हूं.....
पर मिलूंगा तुझसे इक रोज़,
आंखों में गर्व और आत्मविश्वास लेकर,
और पूछूंगा तुझसे,
क्या अभी भी याद आया करता हूं?
वो जो वादे किए थे तुमने
हमेशा साथ देने के,
उन्हें मैं अब तक निभाया करता हूं।
जो जुड़ गयी थी डोर तुमसे,
मैं कैसे काट उसे सकता हूं।
मैं आज तुझको खुदसे रिहा करता हूं.....
By Astitva Tripathi

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