मैं ढूंढ रहा चांद को
Updated: Jul 28, 2025
By Ayush Dhanraj Gupta
मैं ढूंढ रहा चांद को
वो बादल में छिपा कही
तारो से कहे देखो इसे
क्या ये फिर वही
रौशनी बडी तेज थी
चांद छिपाए छिपा नही
ख़ूबसूरती देख तारे गिरे
मैं मन्नत मांगे रूका नही
यह देख बादल रो पड़े
बिजली असमान से गिरी
फिर भी चांद मेरा ढला नही
By Ayush Dhanraj Gupta

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