मैं जरूर आऊँगा
Updated: Jul 16, 2025
By Nandlal Kumar
खरगोश के रोएं से भी कोमल
अहसास की तरह तुम
मेरे दिल में उतर आती हो
जब कोई मेरे पास नहीं होता ।
रात को सोते वक्त रात रानी की तरह
मेरे नथुनों से टकराती हो
और, तभी मुझे याद आते हैं
फूल की पंखुड़ियों से भी कोमल
तुम्हारे होंठ, जिसमें मदिरा भरे थे ।
तुमको खबर नहीं मगर
तुम्हारे रंगीन कपड़ों की जुनूँ-ख़ेज़ महक
ख़्वाब बन-बन कर मेरे जेहन से
टकराती है और,
चीख़-चीख़ कर मुझे
तुम्हारे पास बुलाती है ।
मैं जरूर आऊँगा क्योंकि
मुझे चैन और शांति चाहिए
जो कि तुम्हारी ज़ुल्फ़ों की छाँव
में ही मय्यसर है
तुम्हारी गोद में सर रखना ही
मेरा स्वर्ग है ।
स्त्री की गोद का तापमान
केवल नवजात शिशुओं को ही नहीं
मुझे भी चाहिए, जीने के लिए ।
By Nandlal Kumar

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