मैं कौन हूँ ?
- Hashtag Kalakar
- Dec 12, 2025
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By Anjali Kumari
सही-ग़लत के मध्य की रेखा
वही समझ लो तुम मुझको;
नीति-अनीति के द्वंद्व के बीच
कहीं मिलूँगी मैं तुझको।
दोनों पहलू घर है मेरा
कभी इधर तो कभी उधर;
कभी साँझ की छाया हूँ मैं
कभी कड़कती दोपहर।
कहीं रीति के बंधन में
दबी हुई हूँ सदियों से;
कहीं विरोधाग्नि लिए
तड़प रहीं हूँ सदियों से।
कहीं भयावह दुष्टों से
लड़ रहीं हूँ काली बन;
कहीं सहम कर बैठी हूँ
अबला सी इक नारी बन।
रंग-रूप है इतना कि
ऋषियों का चित्त भी हर लूँ;
देख के जग घबड़ा जाए
वीभत्स रूप जो धर लूँ।
सतीत्व मेरा पद्मिनी सा है
अस्तित्व मेरा- ध्रुवस्वामिनी;
दुष्टों का हर लूँ यश-वैभव
संतों की मैं सुखदायिनी।
"मैं कौन हूँ" का उत्तर इतना
आसाँ नहीं कि जानोगे;
हर मोड़ पर नया रूप दिखेगा
कितनो को पहचानोगे?
By Anjali Kumari

Thoughtful reflection on identity and self-discovery.
❤️❤️❤️
Great 👍
Soulful
💖💖