मैं औरत हूँ
By Manu Singh
हाँ, हाँ मैं औरत हूँ
मैं वही औरत हूँ, जिसपर हर रात आपका ग़ुस्सा निकल जाता है
हाँ, मैं वही औरत हूँ जो फिर भी अपने आंसू सींच कर खाना परोसती है
वही औरत जो आपकी एक प्यार की नज़र के लिए तरसती है
हाँ, मैं वही औरत हूँ
वही औरत, जो सड़कों पर लोगों का मन बहलाती है
वही, जो मर्दों को शक्तिशाली होने का एहसास दिलाती है
जी हाँ, वही औरत जिससे आप जब मन चाहे अपने शरीर की भूख मिटाते हैं
वही, जो खुद भूखी सो जाती है
वही औरत, जिसके लाल होने पर उसे कोने में फ़ेक दिया जाता है
वही, जिसे औरत के नाम पर काटा जाता है
और अच्छे पति के लिए सिला जाता है
अरे! हाँ भई, वही औरत जिसे दर्द नहीं होता
वही, जिसे दबाया जाता है
वही, जिसे परिवार के नाम पर बेचा जाता है
जी हाँ, मैं वही औरत हूँ
अरे हाँ! सुनिए
मैं वही औरत हूँ, जो लाल रंग से एक नयी ज़िंदगी बनाती हूँ
वही, जो खुद से पहले आपके लिए सोचती हूँ
वही औरत, जो मकान को घर बनाती हूँ
जो आपको इंसान बनाती हूँ
औरत, जो ममता बरसाती है
जो आपको काबिल बनाती है
जो प्यार सिखाती है
वही औरत जिसे खुद पर नाज़ है
जी हाँ, मैं औरत हूँ।
By Manu Singh

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