मैं और मेरी किताब (डायरी)
By Pankaj Kumar
जब कुछ लोग मुझे, मेरे हाल पर अकेला छोड़ कर चले गए..,
तब खाली किताब ने मेरी हर एक बात सुनी..!!
जो लिखी थी स्याही से मेरी कहानी मैंने उसने मेरे वो हर एक जज्बात सुनी.
दिन में तो दुनियां थी साथ मेरे तब इस किताब ने मेरी तन्हा रात सुनी..!!
जो चलता रहा मुसलसल मेरे जेहन में और हम किसी से कह न पाए वो अल्फाज सुनी..
दिल में दबे हुए अहसास और इस किताब ने ज़िंदगी में बीते कितने राज सुनी..!!
जब कुछ लोग मुझे, मेरे हाल पर अकेला छोड़ कर चले गए..,
तब इस किताब ने मेरी हर एक बात सुनी..!!
By Pankaj Kumar

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