मैं एक लेखक
By Sheikh Wasim Mustafa (Sheikh Sahab 007)
मैं ज़िन्दगी के इस सफ़र मे लिपटा जा रहा हूं,
मैं एक लेखक, पन्नों मे सिमटा जा रहा हूं ।
ये दस्तुर बयां कर रही इस जमाने को,
धड़कने कह रही फिर दिल लगाने को ।
मैं ख़ुआबों मे कई किताब बुनता जा रहा हूं,
मैं एक लेखक, पन्नों में सिमटा जा रहा हूं ।
By Sheikh Wasim Mustafa (Sheikh Sahab 007)

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