मैं उसे श्याम कहके बुलाती हूँ
Updated: Oct 8, 2022
By Aakanksha Sharma
उसके होने भर से ही,
मेरी ज़िंदगी महकती है।
ये दीलासा की वो है,
मुझे कभी अकेला नही होने देता।
अपने हातों में अक्सर,
उसकी उंगली को जकड़ा पाती हूँ ।
नाम तो कई हैं उसके, कृष्ण, राम, केशव
मैं उसे श्याम कह के बुलाती हूँ।
अभी बस पांव धर कर ज़मीं पर,
चलना ही तो सीखा है मैने ।
हर लड़खड़ाहत पर अपनी,
उसके सहारे के निशां पाती हूँ।
वो कहानियों से बहुत अलग है,
और आडम्बरों से बहुत दूर।
मेरे अंतर्मन की आवाज़ है वो,
जिसमे मैं अपने सारे उत्तर पाती हूँ।
वो वहम में नहीं उलझता,
वो बस मन का आईना पढता है।
अपने सवाल उसे सौंप कर,
मैं जिंदगी से संतुष्ट हो जाती हूँ।
वो रूठता नहीं मेरी अशुद्धियों, मेरी ग़लतियों पे,
उसे तो मुझपर मुझसे भी ज़्यादा भरोसा है।
हल्की मुस्कान के साथ, वो सब समझाता है,
और मैं बचपने में भी सब समझ जाती हूँ।
कुछ लोग शंकित है, सवाल करते हैं,
उसके होने ना होने पर।
वो हंस के कहता है, में ढूंढने से नहीं मिलता,
तुम यकीन करती हो, तो मुझे देख पाती हो।
वो ईश्वर्या के पद से नहीं, मुझे एक दोस्त, एक सहारे की भांति मिलता है,
वो कृष्न है ना,
मुझे अर्जुन और सुदामा की भांति मिलता है।
उसके साथ कि छाया में,
मैं द्रौपदी और मीरा का प्रतिबिंब हो जाती हूँ,
अपने हातों में अक्सर,
उसकी उंगली को जकड़ा पाती हूँ ।
नाम तो कई हैं उसके, कृष्ण, राम, केशव
मैं उसे श्याम कह के बुलाती हूँ।
By Aakanksha Sharma

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