मैं असफल नहीं हूँ
By Anant Srivastav
मैं असफल नहीं हूँ —
मैं बस वह हूँ
जिसने लक्ष्यों को
सपनों से आगे देखा था।
वो लक्ष्य —
जो कभी मेरी आँखों में था,
अब मेरी आँखों में ही
धुंध बनकर ठहर गया है।
मेरी असफलता
एक पराजय नहीं —
वह तो मेरी यात्रा का
अधूरा गीत है,
जिसे वक़्त ने बीच में ही
रोक दिया था
किसी और के शोर से।
मुझे नहीं तोड़ा
मेरे भीतर की कमज़ोरियों ने,
बल्कि
समाज की उस दृष्टि ने
जो सफलता को
केवल पुरस्कारों में मापता है।
मैं गिरा —
उन सवालों से,
जो कभी मुझसे पूछे ही नहीं गए।
मैं हारा —
उन निर्णयों से,
जो मेरी जगह औरों ने लिए।
मुझे कभी दूसरा मौक़ा नहीं मिला —
क्योंकि
यह दुनिया पहले गिरने नहीं देती,
सीधे ठुकरा देती है।
और फिर...
मैंने सीखा —
असफलता कोई दीवार नहीं,
बल्कि एक खिड़की है,
जहाँ से आत्मा
पहली बार खुद को देखती है।
अब मैं चुप हूँ,
पर टूटा नहीं —
मैं रच रहा हूँ
अपने भीतर
एक नई आकृति,
जिसका नाम
'मैं' होगा —
बिना किसी तमगे के,
बिना किसी प्रमाणपत्र के —
बस एक पूरा, परिपक्व मैं।
By Anant Srivastav

वाह