मै ढूंढ रही हूं यादों मै तुम्हे
Updated: Jul 16, 2025
By Shweta Kumari

मै ढूंढ रही हूं यादों मै तुम्हे,
तुम दिल में घर बनाए बैठे हो,
मै शब्दों मै सुनना चाहूं तुम्हे
तुम आंखो से सब कह जाते हो,,
मै मुस्कुराहटों में तलाशती हूं
पर तुम आंसुओ में छिपे बैठे हो,
मै हकीकत में देखना चाहती हूं तुम्हे
पर तुम मेरी कल्पना में समाए बैठे हो
बारिश में भीगी हवा सी भिनी,
सुबह की खिलती धूप सी ताज़ी
मंद मंद मुस्कान को अपनी
ज़माने की नजरों से बचाए बैठे हो,,,
मै शाम का इंतज़ार करती हूं,
और तुम मेरे इंतज़ार की राह तकते हो,
मै मुठ्ठी में बंद करना चाहूं तुम्हे
तुम जुगनू बन उड़ जाते हो।
मै हाथ थाम तुम्हारा चलना चाहूं
पर तुम राह में मेरे छांव बने बैठे हो
मै थक कर तुम्हारे कंधे पर सुस्ताना चाहूं
तुम राहों के कांटे हटाते आगे चलते जाते हो
तुम मेरे और मै तुम्हारी
सार है हम एक दूजे के,
तुम बस्ते हो सांसो में मेरी,
पर तुम मेरा संसार समाए बैठे हो,
By Shweta Kumari

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