मै अलग किस्म का वैरागी हूँ
- Hashtag Kalakar
- Nov 29, 2025
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By Deependra Srivastava
मै अलग किस्म का वैरागी हूँ
न त्याग मेरा स्वभाव
न भोग मे लिप्त हूँ
दुखी भी होता
उसके दिए सुख मे मुँह भी ना चुराता हूँ
पर इन दोनों के पार भी जाने की कला भी रखता हूँ
उसके द्वैत के जाल मे फ़सने का स्वांग भी रचता हूँ
और अद्वैत भी मै हूँ इसका ध्यान भी रखता हूँ
मै अलग किस्म का वैरागी हूँ
माया और मायापति दोनों को खुश रखता हूँ
रोग शोक मुझे भी घेरते
उसके नियम की मर्यादा को रखने को मै प्रेम समझता हूँ
और मै अलग किस्म का वैरागी हूँ
मै बंधन और आत्मा दोनों हूँ
किसी की विरह मे तड़पता भी हूँ
और उससे अछूता भी मै हूँ
मै अलग किस्म का वैरागी हूँ
मै मरता भी हूँ और मै जीता भी नहीं
मै होकर भी नहीं
और नहीं होकर भी हूँ
By Deependra Srivastava

This is something beyond thinking