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मै अनाम हूँ , असीम हूँ

By Deependra Srivastava


अनाम हूँ

असीम हूँ

होना ही एक मात्र मेरा सत्य है

मेरा ना कोई धर्म ना मजहब है

मै आजाद हूँ

मै कैद भी अपनी मर्जी से होता हूँ

मै अपनी प्रकृति मे खुद फसता हूँ

मै हूँ

मै ना आता कही से ना जाता कही हूँ

इस नजर से देख सको तो देखलो

हूँ मै मौजूद हर वक्त

छुपा नहीं मै रहता

निरंतर हूँ प्रकट रहता

तुम भी मेरा एक रूप हो

तुम भी मेरा एक रूप हो


जो भूल बैठे अपना ही वास्तविक रूप हो

गुरुओ के इशारे समझ

मै व्यक्ति होकर भी व्यक्ति नहीं

मै कारण होकर भी अकारण हूँ

मै शरीर मे प्रकट जरूर होता पर मै शरीर नहीं

मै अनेक माध्यम से अपना परिचय देता पर मै माध्यम भी

नहीं

मै समान रूप से सब मे हूँ

पर मै सब जैसा नहीं


By Deependra Srivastava

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