मेहरबानी !
By Shivshankar Santosh Patwa
मेरा जीतना अब उनकी, मेहरबानी लगता है
हारना अब उनको, किस्सा कहानी लगता है
ऐसे भी मंज़र देखे, आँखों के दरिया सूख गए,
सैलाब मेहेस अब बेहता पानी लगता है
इस क़दर पी रहे हैं, ग़म की हर इक बूंद
हँसना मुस्कुराना भी, दुःख की निशानी लगता है
आदतन ही कत्ल करते रहे अपनी ख्वाहिशों का
दिल की आवाज़ आज भी; कोई नादानी लगता है
इस तरह छपे दिल पर ज़ख्म के निशान
ज़िंदा होने कि मानो, यही निशानी लगता है
शरद की चाँदनी में भी, सच मानो दिल ना मुस्कुराया
सच मानो वो चाँद भी हमको, उनकी निशानी लगता है
शिकायत कैसी ज़िंदगी से, और अब कैसा गिला
साँसे आज भी कामिल है, मेहरबानी उनकी, लगता है
By Shivshankar Santosh Patwa

👏❤️
#Hashtag dost Teri shayari chumeshwari
Mere dost aise hi likhte raho likhai mein dam hai
🤌🤌✨
✨✨✨