मेरे प्रिय मित्र : मेरे माधव
By Swati Kumari
मेरे प्रिय,मेरे मित्र हो तुम,मेरे यार हो तुम।
लोगों की कल्पना से परे,मेरे गीत हो तुम,मेरे ज्ञान हो तुम।
लोगों ने साथ छोड़ा,तो मैंने तुमसे नाता जोड़ा।
मेरे मन के अशांत समंदर को जैसे शीतल कर शांत करते हो तुम।
मेरे प्रिय,मेरे मित्र हो तुम,मेरे यार हो तुम।
राधा के लिए प्राण हो तुम,
तो रुक्मिणी का सम्मान हो तुम,
मीरा का बलिदान हो तुम,
तो मेरे लिए मेरा स्वाभिमान हो तुम।
मेरे प्रिय,मेरे मित्र हो तुम,मेरे यार हो तुम।
अर्जुन के सारथी रहे तुम रण-युद्ध में,
मेरे सारथी हो तुम मन-युद्ध में।
कभी खोई हूँ तो संभाले हो तुम,
जब रोई हूँ तो स्नेह से उठाए हो तुम।
मेरे प्रिय,मेरे मित्र हो तुम,मेरे यार हो तुम।
शुक्रिया अदा करूँगी उस हाल का,
जब जीवन में छाया था अंधकार सा।
राधारानी की नज़र हुई तो मिला जैसे वरदान सा,
तुम मुझे मिले मेरे बचपन के एक ख़याल सा।
मेरे प्रिय,मेरे मित्र हो तुम,मेरे यार हो तुम।
By Swati Kumari

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Amazing art with pure talent👌👌👌👌👌
Lovely poetry ❣️ keep it up 👍
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