मेरे पापा
- Hashtag Kalakar
- Dec 22, 2024
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By Shudhanshu Pandey
मेरी खुशी के लिए वह अपनी हर तकलीफ भूल जाते हैं,
मुझे कमी ना हो किसी चीज की वह बिना थके कमाते हैं,
मेरी ख़्वाहिश सिर्फ ख़्वाहिश न रह जाए अपने पैरों को चादर से ज्यादा फैलाते हैं,
मेरा भविष्य उज्जवल हो इसलिए वह खुद को हर रोज जलाते हैं।
पता नहीं पापा इतनी हिम्मत कहां से लाते हैं।
मेरी एक दिन की भी नाराज़गी वह झेल नहीं पाते हैं,
भूल कर अपनी सारी ज़रूरतें मुझे मनाने में लग जाते हैं।
मेरी बुखार का भी इलाज़ वो कैंसर की तरह करवाते हैं,
और अपनी अस्थमा को थोड़ी सी खांसी है का कर छुपाते हैं।
पता नहीं पापा इतनी हिम्मत कहां से लाते हैं।
मेरा मन कर चाहे जो कुछ खाने का वह सबसे महंगी वैरायटी अवेलेबल कराते हैं,
और मेरा मन नहीं है कहकर खुद एक निवाला तक नहीं खाते हैं,
मेरे सपनों को अपना मान वह उसे पूरा करने में लग जाते हैं,
मुझे झुकना ना पड़े किसी के आगे वह सबके आगे झुक जाते हैं।
पता नहीं पापा इतनी हिम्मत कहां से लाते हैं।
अपनी होठों पर झूठी मुस्कान रखकर अपनी तमाम तकलीफों को छुपाते हैं,
मेरे लिए तो बेवक्त कपड़े आते हैं और वह त्योहारों में भी पुराने से काम चलाते हैं।
मेरी सेहत का पूरा ख़्याल है उन्हें ख़ुद तो कभी बासी रोटी खाकर भी चले जाते हैं,
मेरे तो टिफिन में भी मनपसंद खाने होते हैं और वह ऑफिस भी दवाई की बोतल ले जाते हैं।
पता नहीं पापा इतनी हिम्मत कहां से लाते हैं।
By Shudhanshu Pandey

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