मेरे दर्द
Updated: Jul 16, 2025
By Naveen Kumar
पता नहीं कैसा हो गया हूं
दर्द तो होता है मगर
दिल अब रोना नहीं चाहता
किसी के साथ अब होना नहीं चाहता
बंद कर लिया है खुद को यूं
पुकारते है मेरे जज़्बात मगर
सुनना नहीं चाहता,
रातों में तन्हा रहता है मगर
किसी के ख़्वाब सजाना नहीं चाहता
मिलते है वो अब भी राहों में मगर
नज़र से नज़र मिलाना नहीं चाहता
अब अच्छा यूं लगता है अकेलापन
दोस्तों के साथ रहना भी नहीं चाहता,
खाली हो गए घर के हर कमरे मेरे
तन्हाई के सिवा कुछ और रखना नहीं चाहता
बाते भी नहीं, यादें भी नहीं
कुछ अब याद रखना नहीं चाहता
अंधेरे है रस्ते मेरे, अंधेरे ही रहेंगे
चिरागों के पल दो पल का साथ, रखना नहीं चाहता,
झूठ, झूठ ही रहे अब ये सहना नहीं चाहता
कही लिख दूं, किसी को बता दूं
हर एक को मैं ये सच सुनाना हूं चाहता
जिंदगी को सजा और मौत को दुआ बताना हूं चाहता।
By Naveen Kumar

Comments