मेरे घर आए मेहमान
By Dr. Hari Mohan Saxena
शादी ब्याह का पावन मौका
कोई रिश्तेदार न चूका,
सब ही सपरिवार आ गए
खुशियों के बस मेघ छा गए।
नाना, नानी प्रथम पधारे
माँ ने उनके पाँव पखारे,
दादा जी बैठक में आए
दूर किये मिल शिकवे सारे।
मौसी के संग मौसा आए
सबके लिए समौसा लाए,
माँ और मौसी तब बतियाए
झुमके, कंगन सब दिखलाए।
चाचा, चाची दौड़े आए
चैं चैं सुनकर सब घबराए,
चुनमुन को भी साथ में लाए
उसने भी करतब दिखलाए।
ताऊ, ताई अचानक आए
इक संदूक बड़ा ले आए,
सबके लिए खिलौने लाए
देख के सब बच्चे हर्षाए।
बुआ के संग संग आए फूफा
आकर छोड़ा नया शगूफा,
आए क्यों नहीं मुझे बुलाने
सभी जुट गए उन्हें मनाने।
मामा, मामी बड़े रंगीले
कपड़े पहने थे भड़कीले
बारिश में निकले थे घर से
सारे कपड़े हो गए गीले।
भैय्या के संग आई भाभी
गिरी राह में घर की चाभी,
सारे में कोहराम मचाया
पर कोई भी ढूंढ न पाया।
दीदी, जीजा घर पर आए
खुशियों की सौगातें लाए,
दीदी ने जब गले लगाया
आँसू बहे, गला भर आया।
बच्चों की तो मौज हो गई
उनकी पूरी फ़ौज हो गई,
दिनभर करते हल्ला गुल्ला
ख़ुशी ख़ुशी खाते रसगुल्ला।
By Dr. Hari Mohan Saxena




A very interesting and hilarious account of social family relations in the Indian society.