मेरे गुरु
By Dr. Susheela Chaurasia
जो जीने की राह दिखाता है,
जो आगे बढ़ने की चाह लाता है,
जिसका माता-पिता के बाद स्थान है,
वो मेरे गुरु महान हैं।
जो उंगली पकड़ के आगे ले जाए,
जो हिम्मत रख के चलना सिखाए,
जो हमारी हर जीत पर मुस्कुराए,
और अपना सीना गर्व से चौड़ा कर जाए,
वो मेरे गुरु है, मेरा मान है।
जो हर गलती पर हमको टोकता जाए,
जो हर गलती सुधारने का मौका फिर से लाए,
वो मेरे गुरु है, मेरा अभिमान है।
जो भगवान और माता-पिता से कम नहीं,
जिनके अनेको रूप हैं,
हर रूप किसी से कम नहीं,
वो मेरे गुरु हैं, सर्वगुण संपन्न वही।
By Dr. Susheela Chaurasia

Very good poem
Nice poem 👌🏻 👌🏻
Nice
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