मेरी मातृभूमि
By Dr. Susheela Chaurasia
मेरी मातृभूमि तुझे दिल से सलाम,
इस्से ही है मेरी आन, बान और मेरी शान,
इसमें ही हैं मेरा वजूद और मेरी जान,
मेरी जन्मभूमि तुझे दिल से सलाम l
इसमें हैं अनेको प्रांत,
हर प्रांत की हैं अलग-अलग कला और अलग-अलग पहचान,
हर प्रांत को दिल से नमन और दिल से करती हूँ सम्मान,
मेरी मातृभूमि तुझे दिल से सलाम।
होती रहें तेरी तरक्की, बढ़ता रहे तेरा मान,
बनी रहे तेरी ऊर्जा, बनी रहे तेरी शान,
जी करता है ना छोडू उसको, जो करता है तेरा अपमान,
मेरी मातृभूमि तुझे दिल से सलाम।
गुणगान करु तेरे ताजमहल का, या लाल किले का सम्मान,
हर महल यहाँ अनोखा है, हर खण्डर याद दिला देती है वो बलिदान,
मेरी मातृभूमि तुझे दिल से सलाम।
नम हो जाती है ये आँखें,
जब सोचती हूं वो कुर्बानी वो वीर लहू लुहान,
मेरी जन्मभूमि तुझे दिल से सलाम,
तुझसे ही है मेरा मान, मेरा सम्मान,
मेरी मातृभूमि तुझे दिल से नमन, तुझे दिल से प्रणाम।
By Dr. Susheela Chaurasia

Very nice poem 👍
Nice poem 👌🏻 👌🏻
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Very nice
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