मेरी माँ
By Agrima Bajpai
माँ तेरे होने पे मैं तुझको तंग करती हूं,
पर तुझे खोने से सबसे ज्यादा डरती हूं।
तू जब होती है मेरे आस पास तो घर लगता है,
बड़ी नहीं, छोटे ही बने रहने का मन करता है।
माना कि तेरी डांट मुझे अच्छी नहीं लगती,
माना कि तेरी वो नज़र मुझे थी खटकती,
पर माँ, तुझे देखे बिना बढ़ा मुश्किल है दिन गुज़ारना,
अच्छा लगता है मुझे, तेरा मेरा नाम पुकारना ।
माँ तू समझे न समझे तेरा होना ही काफी है,
कुछ बोले बिना समझ जाना, ये सिर्फ तू कर पाती है।
तेरे बिना सूझ-बूझ से करना पड़ता है सारा काम,
पर जब तू होती है ना, बिना सोचे भी सब काम हो जाता है आसान।
तेरी गोदी का सुकून और तेरी लोरी की धुन,
तेरी आंचल की छाया और तेरी उंगलियों की माया,
तेरा मेरी आंखों को काजल से सजाना और चोटी को एकदम मस्त बनाना,
माँ, अपनी वो जादू की छड़ी ज़रा मुझे भी देना।
चाहती हूं मैं तेरे पीछे फिरसे छिपना,
चाहती हूं मैं तेरे पेट में फिरसे घुर-घुर करना,
अपनी बक-बक से करना चाहती हूं तुझे मैं परेशान,
तेरा पल्लू पकड़े पकड़े पार करना चाहती हूं सारे तूफान।
माँ तेरे जैसा भगवान ने सिर्फ एक ही क्यों बनाया,
मेरी बलाएं लेना किसी और को क्यों नहीं सिखाया।
माँ तू मुझे कभी छोड़ के मत जाना,
और अगर जाना तो लौट के वापस जल्दी चली आना।
By Agrima Bajpai

this one hits close to home
Loved it 💗
Mothers are truly the most beautiful gifts god could ever gift anyone 🫶🫶
🫶🫶🫶
Exceptional 💗