मेरी बातों का असर
By Rakesh Ranjan Kumar Singh
मेरी बातों का असर,
जाने कब होगा उधर !
सोचता हूँ हर पल,
कैसे पूरी होगी कसर ?
दर्द-ए-दिल कर दूँ बयां,
दिल में रखा जो छुपा ।
ख़त्म कर शर्म-ओ-हया,
लिख दूँ क्या दास्ताँ ?
ख़त लिख भेजूँ उनको,
या उन्हें मिल के बताऊँ ।
दोस्तों का लूँ सहारा,
या उन्हें दोस्त बनाऊँ ।
जब भी मिलते हैं हम,
होती है तेज़ धड़कन ।
ख़ुशी मिलती है तब,
छूटा जबसे है बचपन ।
By Rakesh Ranjan Kumar Singh

Comments