मेरी परछाई
Updated: Oct 4, 2024
By Nikhil Tandon
“मैं चुप चुप सा रहने वाला
वो है बहुत बातूनी सी
मैं मीठा हूं गुड़ जैसा
वो हरी मिर्च है तीखी सी
मैं बर्फ़ जैसा शीतल सा
वो गरम चाय की प्याली सी
मैं खिली धूप में रेत सा
वो खेतों की हरियाली सी
मैं किनारा एक नदी का
वो समंदर की गहराई सी
मैं अंबर में उड़ते पंछी जैसा
वो ठंडी पवन पुरवाई सी
मैं बारिश की बूंदों जैसा
वो सौंधी माटी की खुशबू सी
मैं मधुर सुरों के साज़ सा
वो ग़ज़लों के अल्फ़ाज़ सी
मैं माली उसके योवन का
वो तितली मेरे उपवन की
मैं रत्ती भर भी न उसके जैसा
पर वो पूरी मेरी परछाई सी”
By Nikhil Tandon

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