मेरी ज़िंदगी का एक पन्ना……
By Priya Jain
कोई जाकर कहो पैगाम मेरा, मैं मरा सा हूं,
कुछ भी नहीं नजदीक मेरे, मैं जरा सा हूं,।।
कहना उसी की लौट आए वक्त में मेरे,
इन दूरियों के शोर से काफी डरा सा हूं,।।
रखता नहीं मैं वास्ता दुनिया जमाने से,
ना हु मिला खुद से भी मैं इतना सताने से,।।
दहलीज पे बैठे गुजारा वक्त करता हूं ,
बो लौट आएंगे दोबारा इस बहाने से,।।
By Priya Jain

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