मेरी कहानी
By Neha Srivastava
लफ़्ज़ों में बयां करूँ कैसे,
लम्हों की नहीं मेरी कहानी है।
खारापन भी है दरिया का ,
लेकिन मैं बहता हुआ नदिया का पानी हूँ।
बिखर गये हैं कई पन्ने, नहीं बची उनकी निशानी है।
दास्तां शुरू हुई तब से,
जब से शुरू हुई जमीं पर ये ज़िन्दगानी है।
आती-जाती हैं लहरें,
टकरा कर बदलती रहती इनकी रवानी है।
सिमट गये हैं मुझमें ये ज़मीं, ये अर्श और ये पानी है।
मेरी जिंदगी अधूरी एक किताब है,
साहिल पर हूँ खड़ी,आँखों में एक इन्तज़ार है ,
देखते हैं कब ,किस मोड़ पर पूरी होती मेरी अधूरी कहानी है
By Neha Srivastava

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