मेरी कविता
By Jyoti Prakash Mohanty
मैं शब्दों को बहने देती हूँ
वे कहाँ से आते हैं?
मेरे हृदय अथवा आत्मा
या कहीं और से,
मुझे नहीं पता।
मैं उन्हें अपने दिमाग में छाँटती हूँ,
उन्हें यथासंभव खूबसूरती से
व्यक्त करने की कोशिश करती हूँ
हालाँकि यह आसान नहीं है।
मैं दर्द से गुज़रती हूँ
परिणाम पसंद करती हूँ
अधिक बार नापसंद करती हूँ
मैं कोशिश करती हूँ
और फिर से कोशिश करती हूँ
टूटे शब्दों की डोरी के साथ
टूटे हुए फ्रेम के साथ
भावनाओं को आकार देती हूँ,
बेहतर परिणाम की उम्मीद करती हूँ।
किसी मोड़ पर मैं निर्णय लेती हूँ
मैं रुक जाती हूँ,
सीमा खींचती हूँ
अब और बेहतर नहीं
इसे अगली बार के लिए
छोड़ने का फैसला करती हूँ।
मुझे नहीं पता,
क्या यह
आपके दिल को छूएगा?
हालाँकि मैंने
अपना सब कुछ
झोंक दिया है इस में..
अगर आपको पसंद ना आए
कोई बात नहीं,
आखिरकार वे मेरे हैं ।
मैंने दर्द सहा है
मैंने कोख़ में लिया है
मैंने जन्म दिया है
वो पीड़ा आप कैसे महसूस करोगे ??
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By Jyoti Prakash Mohanty

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