मेरी कल्पना सी
By Maria Neha
नन्हें कदमों से चली आती है
मुस्कुराकर मुझे अपना बनाती है
भूल जाती हूं घिरी हूं सायों में कई
अपने हाथों से मेरे दामन को सजाती है
वो कहते है एक बोझ है, आफत है तू
पर मेरे दिल के आंगन में, तू तो है मेरी कल्पना सी।
तेरे आने पर लगे देने मुझे ताने कई लोग
बसरने लगा नफरतों का सावन मुझपेर
बादल जो आते, लाते साथ गमों के साए
तूफ़ान भी बनता गवाह मेरी तबाही का
पर फिर भी तेरे स्पर्श से जी उठने लगती
और रोम रोम कहता ये है na, एकदम तेरी कल्पना सी।
वक्त की रेत ने जमा दी धूल मेरे अतीत पर
मुस्कुराते है मुझपर जो कभी रुलाते थे
तेरा नाम लेकर मुझको सराहते है
कामयाबी तेरी अपनी कामयाबी बतलाते है
वो कहते है तू है उनका अक्स
पर कैसे बताऊं उनको, तू तो है मेरी ही कल्पना सी।
आज तेरे घर में आए है नन्हें कदम
भूल न जाना अपनी इस पुरानी तस्वीर को
इंतजार में तेरे, आंखे तकती राहों को,
की चैन आ जाए मेरे बेचैन बूढ़े दिल को
सुनी राह के सिवा कुछ न मिल सका मुझको
तरस कर पलटी तो आई फिर आवाज तेरी
"मां, ले मैं आ गई, अपनी गोद में लेकर फिर तेरी कल्पना सी"।
By Maria Neha

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