मेरा रोशन अंधेरा!
By SIYASTA BISWAS
सब कहते है रोशनी बहतर है उस अंधेरे से, जहाँ सब बंद नजर आता है,
मुझसे पुचो तो अंधेरा उस रोशनी का नाम है जिससे तूने देखा ही नहीं…
काफी आसन लगती है जिंदगी जब अंधेरा हो जाता है,
जैसे खुद को खुदसा लगता है…
दिनभर कई चेहरो के पिछे चुप्पे खुदको गुमशुदा कर बेथे रहते हैं हम,
वो अंधेरा ही तो है जब हमको नजर आते हैं हम…
क्यू लगती सबको ये इतनी मनहूस,
सबसे पाक अंधेरा होता है मुझे महसूस…
हज़ारो जज़्बात जो रोशनी ना समझ पाए,
अंधेरा बाहे खोल कर करता है क़बूल...
हस्ते हुए चेहरे जो सुबह तक होते हैं,
वहींं आंखौ में अक्स बनके अंधेरा कंधे पर रखता है खुदके...
दिन जब ढले तो सुकून मिलता है,
मोहब्बत करना तो अंधेरे ने सिखाया है...
रोशनी में कहां होंगी ये बाते,
वौ अंधेरा ही तो है जो सब सुलझादे!
By SIYASTA BISWAS

Comments