मेरा पहला प्यार
By Niharika singh
सर्दी की ठंड हवाओं में…
गर्मी की तेज धूप में…
बारिश की गिरती हर एक बुंद में…
मैंने बस तुझको देखा है|
हर रोशनी में,, हर अंधेरे में…
हर बदलते दिन में,, हर नई शाम में…
मैंने बस तुझको देखा है|
अपने हर ख्यालों में..
अपनी हर हकीकत में..
मैंने बस तुझको देखा है|
नजरें मिलाकर,, नजरें चुराकर…
मैंने बस तुझको देखा है|
पता नहीं क्या होगा इस रिश्ते का…
पता नहीं कब मिलेंगे हम तुम…
पता नहीं कब होगी तुझको मुझसे मोहब्बत…
पर अपने आज,, और अपने कल में…
मैंने बस तुझको देखा है|
By Niharika singh

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