मेरा जनाजा निकलेगा
By Abhishek Choudhary
बड़े तपाक के साथ एक रोज शामियाना निकलेगा
हर चेहरा मुस्कुराएगा जब मेरा जनाजा निकलेगा।
खुदा से चाहिए वो मौत का मातम के बस
लाश का चेहरा देख खुशनुमा नज़ारा निकलेगा।
क्या ही मंजर होगा वो जब लाश पड़ी होगी मेरी
पास कोई रोएगा तो कोई देकर दिलासा निकलेगा।
मुश्किलों में साथ तेरा कोई देगा भी नहीं
और ना ही तेरे लिए कोई सफ–आरा निकलेगा।
वो तेरा ही है ये वहम निकाल जेहन से तूं
एक कूचे से तूं भी एक दिन मारा–मारा निकलेगा।
जिंदगी से क्या गिला जब मौत हमको प्यारी है
कोई ज़ख्म नहीं होगा जब तन से धुंआ सा निकलेगा।
किसका लिबास ओढ़ कर जमाने से शिकवा करें
हर कहानी का सबब फिर बेतहाशा निकलेगा ।
रक़ीबत में जान बस एक शख्स की ही जाती है
बाकियों की मौत पर कोहरा घना सा निकलेगा।
By Abhishek Choudhary

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