मेरा घर
- Hashtag Kalakar
- Jun 6, 2024
- 1 min read
Updated: Oct 4, 2024
By Nikhil Tandon
"एक शहर था
जो अपना था,
शहर में एक गली थी
जहां सब अपने थे,
गली का वो आख़िरी मकान
हां वही तो मेरा घर था,
घर का वो खुला आंगन
जहां खेला था मेरा बचपन,
आंगन से सटा वो कमरा
छोटा था पर हम सबका था,
कमरे से लगी वो सीढ़िया
जो मुझे छत से मिलाती थीं,
छत पर चलती वो ठंडी पुरवाई
जो मेरी हर थकान मिटा जाती थी,
एक अरसा हुआ अब
उस शहर को छोड़े,
हर बार अब वहां
कुछ नया सा लगता है,
कहीं भूल न जाए मुझे
वो शहर वो गली मेरी,
यह सोच कर भी
मुझे डर सा लगता है,
घर पहुंचता हूं जब तो वो भी
कुछ उखड़ा–उखड़ा सा लगता है,
बहुत दिनों बाद आए इस बार
शायद मुझसे यही शिक़ायत करता है"
By Nikhil Tandon

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