मेरा गाँव
By Tejaswini(Tejoy)
गांव छोड़ा है मैंने खुदका
मेरे अन्दर से गांव छूटा नहीं
बेशक बन गया हूं मैं शहरी
संस्कारो में झलकता गांव आज भी है ।
गांव छूट रहा हैं पीछे
कुछ अपने भी छूट गए
थोड़ा हमदर्दी हूं कल सा
लिबास में गांव आज भी हैं ।
मुखौटो के शहर में
मैंने मुखौटा पहन लिया
दोस्तों यारों को दिखाने
मैं शहरी बन गया ।
अकेला जब होता हूं
घुटता है दिल अकेले में
मुखोंटो के बिच
मरोड़े हुए सपनों में
गांव पीछे छोड़ आया
मुझमें बसा है वो आज भी
मेरे मां के आंचल के पीछे
फीका लगे ये ताज़ भी ।
By Tejaswini(Tejoy)

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